बिल्कुल लाउड स्पीकर हटना चाहिए, लेकिन………………….

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आजकल देश में और खासकर नेशनल चैनलों पर हिजाब के मुद्दे के बाद अब लाउड स्पीकर में अज़ान का मुद्दा गरमाया हुआ है। लोग तो कानून ही हाथ में ले लेते है, गली गली डंडे ले कर लाउड स्पीकर उतरवाना शुरू कर देंगे ? मस्जिदों पर भगवा झंडा लहराएंगे ? मुस्लिम महिलाओं को घर से बाहर निकलवा कर बलात्कार की धमकी देंगे ? ये किस कानून के पालन में आप कर सकते हैं? लाउड स्पीकर हटने की बात है( अर्थात, असल मामला यही है ना कि सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि प्रदूषण के डेसीबल वाले आदेश को ले कर ) बिल्कुल ठीक है, अज़ान, आरती , भजन आदि लाउड स्पीकर पर नहीं होना चाहिए, और अगर कोई ऐसा करता भी है, तो उसके लिए प्रशासन है, पुलिस है, वो उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजे, लेकिन नहीं; जज तो आप ही बन जाते हैं आप तो कानून ही हाथ में ले लेते है, गली गली डंडे ले कर लाउड स्पीकर उतरवाएंगे, मस्जिदों पर भगवा झंडा लहराएंगे, मुस्लिम महिलाओं को घर से बाहर निकलवा कर बलात्कार की धमकी देंगे, ये किस कानून के पालन में आप कर सकते हैं?      

बिल्कुल लाउड स्पीकर हटना चाहिए ; लेकिन….

1- लाउड स्पीकर की आवाज़ त्योहारों पर भी नहीं होना चाहिए; जैसे दुर्गा पूजा के अवसर पर कई दिनों तक 80 डेसिबल ही नहीं, बल्कि 80 से कहीं बहुत ज़्यादा डेसिबल की ध्वनि उत्सर्जित करता है।

2- कोई धार्मिक या सामाजिक या किसी प्रकार का कोई ऐसा जुलूस या कॉन्फ्रेंस नहीं होना चाहिए; किसी भी धर्म का नहीं।

3- विशेषकर राजनीतिक रैलियों में स्पीकर की आवाज़ बन्द होनी चाहिए, आप अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहते हैं तो मोबाइल से पहुंचाइए, यूट्यूब से या अन्य किसी सोशल मीडिया द्वारा।

4- ट्रेनों के हॉर्न ऐसे स्थान पर नहीं बजना चाहिए; जहां आबादी क्षेत्र हो, वहां कोई छात्र पढ़ाई करता होगा, कोई बीमार हो सकता है आदि आदि।

5- जहां तक स्वतन्त्रता की बात है, चाहे वो “आवाज़ ” की हो या किसी भी चीज की —— होली रोड पर नहीं खेलना चाहिए, क्यूंकि रोड ब्लॉक होता है और सिर्फ होली ही नहीं, रोड पर या सार्वजनिक स्थल पर नमाज़ भी नहीं होनी चाहिए; क्यूंकि रोड ब्लॉक होता है।         

बहर हाल ये किसी को दिक्कत का कोई मुद्दा नहीं है, ये असल दिक्कत एक ही वर्ग को है, जो धर्म की गन्दी राजनीति के द्वारा हमेशा सत्ता में बने रहना चाहते हैं, या कोई ऐसी राजनीतिक पार्टियां जो किसी तरह, बिना जनता और समाज के हक के लिए काम किए हुए; सत्ता में आना चाहती हैं; जैसे —– राज ठाकरे — अध्यक्ष, MNS । राज ठाकरे की पार्टी ने 2009 के विधान सभा चुनाव में 13 सीटों पर अपना हिस्सा जमाया था 2014 के विधान सभा चुनाव में उनके खेमे में मात्र एक सीट आई, और 2019 के विधान सभा चुनाव में भी उन्हें मात्र और मात्र एक ही सीट मिली।  शायद इसी असफलता से निराश हो कर राज ठाकरे एक राजनैतिक स्टंट लेते हुए 03 मई तक मस्जिदों से लाउड स्पीकर उतरवाने की धमकी दे गए— उन्हीं के शब्दों में, *” आज 12 तारीख है… 12 अप्रैल से 03 मई तक मस्जिदों के सभी मौलवियों को बुलाकर उन्हें समझा दिया जाए कि सभी मस्जिदों पर लगने वाले लाउड स्पीकर उतारे जाएं, 03 मई के बाद हमारी तरफ से आपको कोई तकलीफ नहीं होगी”* और वो ये भूल गए कि देश में संविधान है, न्यायालय है, खुद ही न्यायाधीश बन बैठे। खैर , एक कहावत है कि — बौरानी बिल्ली खंबा नोचे । इनके पास अपनी सीट बढ़ाने के सारे उपाय खत्म हो गए तो इन्होंने ऐसा स्टंट लिया ताकि 2024 के चुनाव में BJP के साथ गठबंधन हासिल हो। लाउड स्पीकर वाला दांव राजनीतिक या धार्मिक एवं साम्प्रदायिक ? क्या राज ठाकरे एक समुदाय को टारगेट नहीं कर रहे हैं ? क्या यही चलेगा अब देश में, लंबे समय से लाउड स्पीकर का इस्तेमाल हो रहा है, हर जगह होता है, लेकिन दिक्कत इन्हें सिर्फ अज़ान से ही हुई, क्यूंकि जो धर्म की राजनीति करना है। अरे साहब लाउड स्पीकर पर ही बैन लगा दीजिए, ना रहेगा ना ही कहीं बजेगा। कुछ समय पहले; पन्नी ( प्लास्टिक के थैले ) पर ठेले वाले दुकान लगाने वाले फल और सब्जी वाले कमजोर लोगों पर जुर्माने लगाए जा रहे थे। अरे साहब आप पन्नी बनाने वाली फैक्टरियों पर ही बैन लगा देते, पन्नी बनती ही नहीं तो बिकती ही कहां से? ठीक उसी प्रकार, लाउड स्पीकर बिकना ही बंद हो जाए तो बजेगा कहां से? लेकिन आपको तो मुद्दा चाहिए, कमज़ोर और शोषित वर्ग का और अधिक शोषण करने का ।
 *धन्यवाद !*

संवाददाता अबू आमिर की कलम से

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