‘यूनिफॉर्म सिविल कोड का लागू होना जरूरी’ तसलीमा नसरीन

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नई दिल्ली: अपने विचारों से इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर रहने वाली मशहूर बांग्लादेशी लेखिका तसलीम नसरीन (Taslima Nasreen) ने हिजाब के मुद्दे पर अपनी राय जाहिर की है. उन्होंने हिजाब (Hijab) को अंधकार युग का पट्टा करार दिया है. उन्होंने कहा कि बुर्का या हिजाब कभी भी औरत की पसंद नहीं हो सकती है. तसलीमा नसरीन ने कहा कि राजनीतिक इस्लाम की तरह अब हिजाब भी सियासी मसला हो गया है लेकिन धर्म का अधिकार शिक्षा के अधिकार (Right to Education) से ऊपर नहीं है.

बांग्लादेशी लेखिका तसलीम नसरीन का यह बयान उस वक्त सामने आया है जब कर्नाटक के स्कूल-कॉलेज में हिजाब को लेकर गतिरोध जारी है. वहीं इस मामले पर देश की राजनीति में हिन्दू बनाम मुस्लिम की सियासत भी शुरू हो गई है.

हिजाब के मुद्दे पर तसलीमा नसरीन ने एक न्यूज प्लेटफॉर्म पर अपने विचार साझा किए. इसमें उन्होंने लिखा कि, मुस्लिम महिलाओं को बुर्के में देखना बिल्कुल अंधकार युग के पट्टे की तरह है. मेरा मानना है कि इस विवाद को खत्म करने के लिए समान नागरिक संहिता और समान ड्रेस कोड होना बहुत जरूरी है. धर्म का अधिकार शिक्षा के अधिकार से बड़ा नहीं है.

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