कोरोना से पति खोने वाली महिलाओं को रोजगार देगी प्रदेश सरकार

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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना काल में जहां पूरे देश में सभी तरह की गतिविधियां ठप पड़ गई थीं, गोरखपुर समेत पूरे यूपी में इस बीमारी से बचाव के बीच ही विकास कार्य भी जारी रखे गए। कोरोना कमजोर हुआ है लेकिन अभी खत्म नहीं हुआ है। घर से निकलें तो मास्क जरूर लगाएं और दो गज दूरी का मंत्र न भूलें। मुख्यमंत्री बुधवार को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित 80.25 करोड़ की 123 परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने बटन दबाकर इन परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया। इनमें 40.72 करोड़ की 75 परियोजनाओं का लोकार्पण और 39.54 करोड़ की 48 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के कारण निराश्रित महिलाओं के लिए सरकार योजना बना रही है। शिविर लगा कर ऐसी महिलाओं की पेंशन के फार्म भरवा कर पेंशन दी जाएगी। इन महिलाओं को उनकी योग्यता के मुताबिक काम दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है, उनके विधिक अभिभावकों के खाते में जल्द ही चार-चार हजार रुपये भेज दिए जाएंगे। उन्हें यह सहायता हर माह मिलेगी। इन बच्चों की पढाई, स्वास्थ्य से लेकर उनके रहने तक की व्यवस्था सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि समाज का जागरूक नागरिक होने की वजह से हम सभी की जिम्मेदारी है कि जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति सहानुभूति दिखाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत पटरी व्यावसाइयों की मदद की जा रही है। का पड़ स्वास्थ्य से लकर की रहन तक की व्यवस्था सरकार करना।

आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास का कोई विकल्प नहीं है। इससे खुशहाली आती है। किसी भी गांव कस्बे में कोई योजना मंजूर हो तो बिना व्यावधान डाले सभी को उसमें सहयोग करना चाहिए। विकास योजनाएं किसी व्यक्ति या एक समुदाय मात्र के लिए नहीं होती बल्कि सभी के लिए होती है। सबका साथ, सबका विकास की सोच के साथ योजनाएं तैयार की जाती हैं। विकास से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे जिससे आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना साकार होगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं। मगर जरूरी है कि संबंधित विभाग, जिम्मेदार अफसर योजनाबद्ध तरीके से इसे आगे बढ़ाएं। मुख्यमंत्री बुधवार को महायोगी गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जहां लोग जागरूक नहीं, वहां विकास कार्यों में अड़ंगाबाजी शुरू हो जाती है। उन्हें नही पता रहता कि विकास कार्य में देर होने से लागत बढ़ती है। बढ़ी लागत स्वीकृत कराने में वक्त लगता है, परियोजना समय से पूरी नहीं हो पाती और लोग उसके लाभ वंचित रह जाते है। से जनप्रतिनिधि, शासन, प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा होना पड़ता है। ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि सड़क, बिजली, नाली, स्कूल कॉलेज, पॉलिटेक्निक या कोई भी बड़ी परियोजना स्वीकृत हो रही है तो बिना किसी बाधा के परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।

पूरी हुई लोकार्पण वाली परियोजनाएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच, सहजनवां, गोरखपुर शहर, बांसगांव, खजनी, पिपराइच विधानसभा क्षेत्र की जिन भी परियोजनाओं का बुधवार को लोकार्पण हुआ वे कोरोना काल में पूरी हुई। उन्होंने कहा कि जब देश में कोरोना की वजह से लॉकडाउन था तो प्रदेश सरकार ने कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए विकास कार्यों को भी जारी रखा। लोगों को जीवन बचाने के साथ उनकी जिविका भी बचाई। यह सिलसिला आज भी जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता, सरकार गरीब मजदूरों के परिवारों की चिंता करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के मॉडल की सराहना की

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में उत्तर प्रदेश सरकार देश भर से घर वापसी करने वाले 40 लाख प्रवासी कामगारों की स्किल मैपिंग कर उन्हें रोजगार उपबल्ध कराया। इस मॉडल की सुप्रीम कोर्ट ने सराहना की। ऐसे लोगों को आसान दरों पर विभिन्न योजनाओं में अनुदान पर ल उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि पीएम स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, एक जिला एक उत्पाद योजना, पीएम स्टार्टअप योजना जैसे कई कार्यक्रम है जिनसे जुड़ कर स्थानीय स्तर पर रोजगार किया जा सकता है।

अक्तूबर में खाद कारखाने और एम्स का लोकार्पण करेंगे पीएम

लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि खाद कारखाना और एम्स का काम अब तकरीबन चुका है। अक्तूबर पूरा हो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनका लोकार्पण करेंगे। बता दें कि 2016 में प्रधानमंत्री ने ही मानबेला में आयोजित जनसभा के दौरान खाद कारखान और एम्स की आधारशिला भी रखी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद कारखाने से जहां पूर्वाचल के किसानों को सस्ती खाद मिलेगी वहीं, युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसी तरह एम्स बन जाने से अब गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल और बिहार से सटे इलाकों की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दिल्ली, मुंबई या बंगलूरू नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हो चुका है। यहां पर्यटन विकास की संभावनों को मजूबत करते प्राचीन और पौराणिक महत्व के मंदिरों का पुनरुद्धार कराया जा रहा है। चाहे भौवापार का शिव मंदिर हो या फिर बांसगांव का मंदिर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने पर यहां जो भी लोग आएंगे। इससे आसपास के लोगों के लिए रोजगार का सृजन होगा। हुए

सरकार ने भत्तों को वेतन के 50% पर किया सीमित

उद्योग की कुछ चिंताओं को दूर करने के प्रयास में सरकार चार श्रम संहिताओं के तहत प्रस्तावित नियमों पर फिर से विचार कर रही है। नए श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रस्तावित नियमों की समीक्षा शुरू कर दी है कि क्या किसी बदलाव की जरूरत है। जल्द ही मंत्री द्वारा उद्योग निकायों और ट्रेड यूनियनों से परामर्श करने की संभावना है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, अधिकारियों ने नए मंत्री को नियमों के बारे में एक प्रेजेंटेशन दिया है। इसमें कोई भी सुधार करना उनका विशेषाधिकार है। चार संहिताओं में शामिल, वेतन संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता का उद्योग के लिए रोजगार की लागत पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। सरकार ने भत्तों को वेतन के 50 प्रतिशत पर सीमित कर दिया है, जिससे इंप्लॉयर्स द्वारा उच्च ग्रेच्युटी भुगतान की संभावना है।

इंप्लॉयर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली इंडस्ट्री बॉडीज ने सरकार से ग्रेच्युटी भुगतान के लिए एक ‘ग्रैंडफादरिंग क्लॉज’ पेश करने की मांग की है क्योंकि कोड्स के तहत ‘वेतन’ की नई परिभाषा से प्रति कर्मचारी लागत में काफी वृद्धि होगी। उन्होंने नई वेतन परिभाषा के तहत कुछ फ्लेक्सिबिलिटी की भी मांग की है, जिसने वेतन के 50 प्रतिशत पर भत्ते को सीमित कर दिया है।

जल्द ही राज्यों के साथ बैठक

श्रम मंत्रालय ने इस साल मार्च में सभी चार संहिताओं में अपने डोमेन के तहत नियम बनाए थे। नए लेबर कोड्स 1 अप्रैल से लागू होने वाले थे। हालांकि, ऐसा हो नहीं सका क्योंकि कोई भी राज्य अपने डोमेन में नियमों के साथ तैयार नहीं था। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राज्यों की एक बैठक भी बुलाए जाने की संभावना है ताकि उन्हें अपने क्षेत्र में नियम बनाने में तेजी लाने के लिए कहा जा सके, जिससे संहिताओं को जल्द से जल्द लागू किया जा सके। बता दें कि केंद्र ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार श्रम सहिताओं में समेकित किया है। इनमें मजदूरी संहिता; सामाजिक सुरक्षा संहिता; औद्योगिक संबंध संहिता व व्यावसायिक, सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति संहिता शामिल हैं। संसद ने 2020 में चार में से तीन श्रम संहिताओं को पारित किया था, जबकि मजदूरी संहिता को 2019 में ही मंजूरी दे दी गई थी।

ईएमआई, सैलरी, पेंशन से जुड़े नियमों में एक अगस्त से हो रहा है बदलाव

किसी को सैलरी का भुगतान कब होगा अगर यह सवाल किसी नौकरी पेशा व्यक्ति से पूछा जाए तो उसका जवाब रहता है कि जब बैंक खुलेंगे तब पैसा अकाउंट में क्रेडिट होगा। लेकिन कई बार देखा जाता है कि महीने की शुरुआत छुट्टियों से होती है। जिसकी वजह से लोगों को सैलरी के क्रेडिट होने के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता था। लेकिन 1 अगस्त से हो रहे नियमों के बदलाव की वजह से अब महीने की पहली तारीख को ही आपके खाते में सैलरी आ जाएगी। आइए जानते हैं कि किस नियम के बदलने से यह सुविधा मिलेगी साथ ही EMI और पेंशन से इसका क्या कनेक्शन है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की घोषणा के अनुसार 1 अगस्त से सैलरी, पेंशन और वस्तु कि भुगतान 24×7 किया जा सकेगा। इसी साल जून में ऋढ़ गवर्नर ने द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा के वक्त कहा था कि नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) की सुविधा अब सप्ताह के सभी दिन उपलब्ध रहेगी। अभी यह सुविधा बैंकों के कार्यदिवसों के दिन ही उपलब्ध होती है।

जून में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा करते हुए कहा था कि ग्राहकों को सुविधाओं के विस्तार तथा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाली रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) का पूरा लाभ लेने के लिए एनएसीएच को एक अगस्त, 2021 से सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

क्या होता है NACH

यह एक ऐसी बैंकिंग सर्विस है जिसके जरिए कंपनियां और आम आदमी पेमेंट प्रक्रिया आसानी से पूरी कर लेते हैं। सैलरी पेमेंट, पेंशन ट्रांसफर, इलेक्ट्रिक बिल, पानी का बिल का पेमेंट इसी के जरिए होता है। तब आरबीआई गर्वनर ने कहा था, इस प्रक्रिया के सुधार के बाद सरकारी सब्सिडी समय और पारदर्शी तरीके से लोगों के खातों में पहुंच जाएगी।

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